जालंधर (दीपक पंडित) जालंधर के डीसी दफ्तर के बाहर अध्यपकों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। दरअसल, अध्यपकों गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों से भड़के हुए हैं। बताया जा रहा है कि, अध्यपकों से लगातार ली जा रही गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों और दोहरी-तेहरी ड्यूटियों के विरोध में आज विभिन्न अध्यपक संगठनों ने एकजुट होकर उपायुक्त (डीसी) कार्यालय पर भारी संख्या में प्रदर्शन किया। इस दौरान एलीमेंट्री टीचर यूनियन और सांझा अध्यापक मोर्चा पंजाब के बैनर तले एकत्रित हुए अध्यपकों ने डीसी को एक मांग पत्र सौंपा। इसके साथ ही उन्होंने अध्यपकों का उत्पीड़न बंद करने की मांग की है।
एलीमेंट्री टीचर यूनियन जालंधर के जनरल सेक्रेटरी रामपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्कूलों में अध्यपकों की संख्या पहले से ही बेहद कम है। इसके बावजूद अध्यपकों को जनगणना और ड्रग सेंसस जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में झोंका जा रहा है। एक-एक अध्यपक की दोहरी, तेहरी और चौहरी ड्यूटियां लगाई जा रही है, जिससे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को नुकसान हो रही है वहीं अध्यपक मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। अध्यपक नेताओं ने वर्तमान ‘आप’ सरकार को उनका चुनावी वादा याद दिलाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि अध्यापकों से केवल अध्यापन का कार्य कराया जाएगा और गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए बेरोजगार युवाओं को आउटसोर्स पर रखा जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
इस दौरान सांझा अध्यापक मोर्चा के नेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि ड्रग सेंसस की ड्यूटी पूरी तरह स्वैच्छिक लेकिन इसके बावजूद जो अध्यपकों यह ड्यूटी नहीं करना चाहते, उन्हें विभाग द्वारा नौकरी से निकालने और वेतन रोकने की धमकियां देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
अध्यपक संगठनों ने मांग की है कि जिन अध्यपकों ने पहले ही जनगणना की ड्यूटी की है, उनकी ड्रग सेंसस में डबल ड्यूटी तुरंत रद्द की जाए। प्रति घर 250 रुपये के मानदेय पर यह काम बेरोजगार युवाओं को सौंपकर उन्हें रोजगार का अवसर दिया जाए। अध्यापकों को जारी किए गए सभी प्रताड़ना वाले नोटिस तुरंत वापस लिए जाएं। यूनियन नेताओं के अनुसार, डीसी जालंधर ने आश्वासन दिया है कि दोहरी ड्यूटियां काट दी जाएंगी और काम वॉलंटियर स्तर पर ही कराया जाएगा। इस दौरान अध्यपक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर जारी किए गए नोटिस रद्द नहीं किए गए, तो जिला प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

