
जालंधर (दीपक पंडित) जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra) पंजाब के एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता (Human Rights Activist) थे। उन्होंने 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में आतंकवाद के दौर में ‘लापता’ हुए हजारों लोगों और उनके गैर-कानूनी तरीके से किए गए अंतिम संस्कार का सच दुनिया के सामने उजागर किया था। खालरा जी के जीवन के बारे में कुछ मुख्य और महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं:
पेशा और पृष्ठभूमि: उनका जन्म 2 नवंबर 1952 को अमृतसर जिले के खालरा गाँव में हुआ था। वह पेशे से एक बैंक अधिकारी (Bank Employee) थे।
बड़ा खुलासा (Secret Cremations): खालरा जी ने नगर निगम के रिकॉर्ड की गहन जाँच करके यह खुलासा किया था कि पंजाब पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से लगभग 25,000 सिखों और अन्य लोगों का अपहरण करके, उन्हें मार डाला और उनके शवों को लावारिस बताकर चुपचाप जला दिया।
अपहरण और शहादत: सच उजागर करने के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलीं। 6 सितंबर 1995 को पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने उनके घर के बाहर से उनका अपहरण कर लिया था। इसके बाद पुलिस हिरासत में उन्हें भयंकर यातनाएं दी गईं और उनकी हत्या कर दी गई। उनका शव कभी नहीं मिला।
न्याय की लड़ाई: इस हत्याकांड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ा और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जाँच की। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, विशेष अदालत और सुप्रीम कोर्ट ने उनके अपहरण और हत्या के मामले में कई पुलिस अधिकारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
वर्तमान में विरासत: उनकी शहादत के बाद उनकी पत्नी, बीबी परमजीत कौर खालरा, ने मानवाधिकारों और न्याय के लिए अपने पति के मिशन को आगे बढ़ाया। उनके साहस और सच्चाई की गवाही आज भी सिख इतिहास में बहुत सम्मान के साथ याद की जाती है।क्या आप जसवंत सिंह खालरा जी के जीवन पर आधारित किसी विशेष घटना, उनके द्वारा किए गए खुलासों, या उनके परिवार द्वारा चलाए जा रहे न्याय आंदोलन के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं?

