चंडीगड़ (द पंजाब प्लस) पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म को अचानक OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। खालड़ा ने आतंकवाद के दौर में पंजाब में फेक एनकाउंटर में 25 हजार युवाओं को मारने का दावा किया था। यह फिल्म 3 साल की रोक के बाद 2 दिन पहले ही नाम बदलकर रिलीज की गई थी। पहले इसका नाम ‘पंजाब 95’ था, जिसे ‘सतलुज’ नाम से OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था।
फिल्म हटाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने कहा- एक इंसानियत होती है, वह इंसानियत मर गई। मुझे इस बात का दुख नहीं है कि फिल्म इंटरनेट से हटा दी गई, क्योंकि फिल्म लोगों तक पहुंच चुकी है। एक बार जो चीज इंटरनेट पर आ गई, उसे हटाना आसान नहीं है। इनके सलाहकार ठीक नहीं हैं। इस फिल्म के साथ वही हुआ, जो खालड़ा जी के साथ हुआ था। फिल्म हटाने पर पंजाबी कलाकारों ने गुस्सा जताया है।
वहीं फिल्म क्यों हटाई गई, किसने हटवाई, इसको लेकर कोई खुलासा नहीं हुआ है। OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 के बयान में सिर्फ इतना कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अगले आदेश तक ‘सतलुज’ प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहेगी। कंपनी ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी उचित विकल्प तलाश रही है, ताकि फिल्म को जल्द से जल्द फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
दिलजीत की इस फिल्म में पूर्व CM बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट में हत्या का सीन भी दिखाया गया है। फिल्म की कहानी के लिए इस सीन को एक टर्निंग पॉइंट के रूप में दिखाया गया है कि इसके बाद पुलिस की क्रूरता शुरू हुई। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि कैसे पुलिस की क्रूरता और निर्दोष लोगों पर बढ़ते अत्याचारों के कारण एक आम आदमी अंदर से टूट जाता है और आतंकवाद या इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है। इसमें तत्कालीन DGP केपीएल गिल को IPS बिट्टा के तौर पर दिखाया गया है।
फिल्म में दिखाया गया है 31 अगस्त 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या होती है और इस घटना के ठीक एक हफ्ते बाद यानी 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा का भी अपहरण कर लिया जाता है। मुख्यमंत्री की मौत के बाद जब राजनीतिक माहौल बदला, तो पुलिस को डर था कि खालड़ा उनके इस 25 हजार अवैध दाह-संस्कार के काले राज को दुनिया के सामने न ले आएं, इसलिए वे खालड़ा का अपहरण करने का कदम उठाते हैं।

