जालंधर (दीपक पंडित) जालंधर में नूरमहल के पुराने बस अड्डे पर मिसल सतलुज संगठन नकोदर ने फिल्म ‘सतलुज’ के समर्थन में प्रदर्शन किया। संगठन के प्रधान स. दविंदर सिंह संगोवाल ने बताया कि यह प्रदर्शन फिल्म को रिलीज न करने के खिलाफ किया गया है, जो सिखों पर हुए कथित अत्याचारों को उजागर करती है।
स. दविंदर सिंह संगोवाल ने जानकारी दी कि फिल्म भाई जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष को दर्शाती है। खालड़ा ने उन 25 हजार नौजवानों, बुजुर्ग माताओं और बहनों के शवों को ढूंढने का प्रयास किया था, जिन पर प्रशासन द्वारा कथित तौर पर अत्याचार किए गए थे।
संगठन ने आरोप लगाया कि 1947 के बंटवारे से लेकर वर्तमान तक की सरकारों ने पंजाबी समुदाय और देश पर कथित रूप से जुल्म किए हैं। उनका कहना था कि पुलिस प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने लाखों बेगुनाह नौजवानों, माताओं, बहनों और बुजुर्गों की हत्या की।
दविंदर सिंह संगोवाल ने कहा कि जब भी किसी ने सच सामने लाने की कोशिश की, उसे या तो गायब कर दिया गया या झूठे आरोपों में जेल भेज दिया गया। उन्होंने दावा किया कि ‘सतलुज’ फिल्म को 4 साल तक रिलीज नहीं होने दिया गया, क्योंकि यह पंजाबी सिखों पर हुए अत्याचारों को दुनिया के सामने लाती है और पिछली सरकारों के चेहरे बेनकाब करती है।
संगठन ने मांग की, कि पंजाब के दर्दनाक इतिहास को हिम्मत से सामने लाने वाली सच्ची फिल्म को भारत के सभी सिनेमाघरों में बिना किसी कट के दिखाया जाना चाहिए।

