जालंधर (दीपक पंडित) जालंधर में पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारियों ने शुक्रवार को रोडवेज के डिपो-1 और 2 में हड़ताल कर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है और सूबे के सभी 27 डिपुओं पर गेट रैलियां कर रोष प्रदर्शन किया।
सूबा चेयरमैन बलविंदर सिंह राड़ ने कहा कि हमने पहले 10 तारीख को ट्रांसपोर्ट मंत्री के हलके दिड़बा में प्रदर्शन का प्रोग्राम दिया था, लेकिन सरकार ने हमें 15 को मीटिंग का समय दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मीटिंग से ठीक एक दिन पहले विभाग ने गुमराह करने की कोशिश की और कुछ नेताओं को अलग से ले जाकर समय की मांग की।
बलविंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार जो नई पॉलिसी लेकर आई है वह विभाग को पूरी तरह खत्म करने वाली है। इसमें कर्मचारी के रिटायर होने के बाद उसकी पोस्ट भी खत्म कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ 18 मई की मीटिंग तय हुई है, लेकिन अगर इसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकला तो पंजाब में तुरंत चक्का जाम और हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
जालंधर डिपो के जनरल सेक्रेटरी चानण सिंह ने कहा कि सरकार डेड कैडर पॉलिसी को जबरदस्ती लागू करना चाहती है, जिसके विरोध में आज डिपुओं पर कॉपियां जलाई गई हैं। उन्होंने बताया कि विभाग के अफसर कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारियों को एक हफ्ते में ज्वाइन कराने का दबाव बना रहे हैं। इस पॉलिसी में कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं है।
चानण सिंह के अनुसार इस पॉलिसी में प्रमोशन का कोई प्रावधान नहीं है। अट्ठावन साल के बाद कर्मचारियों को बिना किसी डीए टीए या भत्ते के घर भेज दिया जाएगा। उन्होंने किलोमीटर स्कीम के तहत डाली जा रही प्राइवेट बसों का भी कड़ा विरोध किया और कहा कि सरकार ने पहले भी विरोध करने वाले वर्करों पर पर्चे दर्ज कर उन्हें जेलों में डाला था।
कर्मचारी नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि वे सरकारी विभाग का निजीकरण नहीं होने देंगे। 18 मई को अगर सरकार मांगों से पीछे हटती है तो पूरे पंजाब में बसों के पहिए थाम दिए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

