जालंधर (दीपक पंडित) पंजाब की सियासत में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित वीडियो को लेकर विवाद गहरा गया है। श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और मर्यादा पर बात करते हुए कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने मुख्यमंत्री को नसीहत दी है। विधायक ने कहा कि फॉरेंसिक जांच में वीडियो के मूल (ओरिजिनल) होने की पुष्टि के बाद भी मुख्यमंत्री अपनी गलती मानने के बजाय इससे इनकार कर रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर अकाल तख्त साहिब से सीधा टकराव पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय उन्हें विनम्रता दिखाते हुए मर्यादा का पालन करना चाहिए। सिख कौम में श्री अकाल तख्त साहिब की एक अलग और सर्वोच्च अहमियत है।
कांग्रेस विधायक ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि यह वीडियो उनका नहीं है और चाहे इसकी फॉरेंसिक जांच करवा ली जाए। हालांकि अब फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि वीडियो में किसी तरह की छेड़छाड़, एडिटिंग या एआई का उपयोग नहीं किया गया है और उसे मूल (ओरिजिनल) पाया गया है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री अपने बयान से पलटते हुए यह कह रहे हैं कि वह उस वीडियो में मौजूद ही नहीं हैं। इस रुख को लेकर अब अकाल तख्त साहिब के फैसले पर दोबारा समीक्षा की जरूरत बताई जा रही है।
विधायक परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर मर्यादा न रखने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि पंजाब विधानसभा के भीतर भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जब कांग्रेस ने कथित तौर पर सीएम के शराब पीकर सदन में आने के आरोप को लेकर कड़ा विरोध जताया था। मुख्यमंत्री को अपनी मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। यदि इस तरह की घटनाएं होती रहीं, तो धीरे-धीरे व्यवस्था और धार्मिक संस्थाओं से लोगों का विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।
29 जून को विधायकों को तलब किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब या संबंधित संस्था से कोई बुलावा आता है, तो वे निश्चित रूप से वहां उपस्थित होंगे। उन्होंने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि इस संवेदनशील मामले में सिख बुद्धिजीवियों (इंटेलेक्चुअल्स) और सिख संस्थाओं से राय ली जानी चाहिए। जिस विषय का पूरा ज्ञान न हो, उस पर धार्मिक विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेना ही उचित कदम है। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि किसी गलती की वजह से सिखी की मर्यादा को नुकसान न पहुंचे।

